आपके दैनिक आहार में छिपे 5 जहर

आपके दैनिक आहार में छिपे 5 जहर (और ये चीनी से भी बदतर क्यों हैं)
हम सब जानते हैं कि बहुत ज्यादा रिफाइंड चीनी का सेवन हमारी सेहत के लिए खराब है, लेकिन क्या होगा अगर आपके रोजमर्रा के खाने में इससे भी कहीं ज्यादा खतरनाक चीजें छिपी हों [1]? बिस्कुट, पीनट बटर, इंस्टेंट नूडल्स और यहां तक कि “हेल्दी” स्नैक्स जैसी रोजमर्रा की चीजों में ऐसे रसायन भरे होते हैं जो यूरोप और अमेरिका जैसे देशों में बैन या प्रतिबंधित हैं, लेकिन भारत में धड़ल्ले से खाए जा रहे हैं [1, 2]।
अगर हम टॉक्सिसिटी (जहरीलेपन) के स्केल पर रिफाइंड चीनी को 10 में से 5 का स्कोर दें, तो नीचे दी गई पांच चीजों का स्कोर इससे काफी ज्यादा होगा [3]। यहां उन पांच सबसे खतरनाक इंग्रेडिएंट्स के बारे में बताया गया है जो छुपकर आपकी सेहत को बर्बाद कर रहे हैं और आपके शरीर में धीमे जहर (स्लो पॉइजन) की तरह काम कर रहे हैं [4]।
1. हाइड्रोजनेटेड ऑयल (टॉक्सिसिटी स्कोर: 8.5/10)
यह क्या है: इसे आम भाषा में डालडा या वनस्पति घी भी कहा जाता है [5]। यह एक लैब-मेड इंग्रेडिएंट है जिसे सस्ते वेजिटेबल ऑयल को हाइड्रोजन गैस के साथ मिलाकर बनाया जाता है, जिससे यह सख्त और सॉलिड फैट बन जाता है [5]। इसका आविष्कार खाने के लिए नहीं बल्कि फैक्ट्री में सस्ती मोमबत्ती और साबुन बनाने के लिए हुआ था [5]।
यह कहां छिपा है: यह आपको पॉपुलर बिस्किट्स (जैसे सनफीस्ट, पारले, और हाइड एंड सीक), पीवीआर के महंगे पॉपकॉर्न, पैकेट वाले बटर पॉपकॉर्न और यहां तक कि पीनट बटर (तेल को ऊपर तैरने से रोकने के लिए) में मिलेगा [1, 2, 5]। इसे अक्सर पैकेट पर “एडिबल वेजिटेबल फैट” के रूप में लिखा जाता है [3]।
खतरा: यह लैब में बना फैट सीधा जाकर आपके दिल की नसों में सीमेंट की तरह जम जाता है [5]। यह कम उम्र के फिट लोगों (जिनका वजन ठीक है, जो स्मोक नहीं करते और जिन्हें हार्ट डिजीज की कोई हिस्ट्री नहीं है) में प्रीमेच्योर हार्ट अटैक का सबसे बड़ा ट्रिगर है [3]। जहाँ चीनी आपको मोटा करती है, वहीं हाइड्रोजनेटेड ऑयल सीधे आपके दिल को ब्लॉक करता है [2]। यह इतना खतरनाक है कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) इसे पूरी दुनिया से खत्म करने का कैंपेन चला रही है, और यह अमेरिका, कनाडा, सिंगापुर और सऊदी अरेबिया जैसे देशों में बैन है [2, 3]।
2. INS 627 और INS 631: दिमाग को हैक करने वाले (टॉक्सिसिटी स्कोर: 8/10)
यह क्या है: 2015 में मैगी और MSG (अजीनोमोटो) पर भारी विरोध के बाद, फूड कंपनियों ने MSG की जगह दो नए केमिकल्स का इस्तेमाल शुरू कर दिया: INS 627 और INS 631 (जिन्हें कभी-कभी मिलाकर INS 635 के रूप में इस्तेमाल किया जाता है) [6, 7]।
यह कहां छिपा है: इनका भारी मात्रा में इस्तेमाल लेज़ (Lays), कुरकुरे, बिंगो, मैगी और यहां तक कि “हेल्दी” मार्केट किए जाने वाले प्रोडक्ट्स जैसे टाटा सोलफुल मसाला ओट्स, फ्लेवर्ड मखाना और सोया स्टिक्स में हो रहा है [7]।
खतरा: मेडिकल साइंस में इन केमिकल्स को “एक्साइटोटॉक्सिंस” (Excitotoxins) कहा जाता है [6]। ये आपके ब्लड-ब्रेन बैरियर को बायपास करते हैं और आपके टेस्ट बड्स को इतना हैक कर लेते हैं कि आपका दिमाग पेट फुल होने का सिग्नल ही भूल जाता है [6]। इसीलिए आप चिप्स का पैकेट खोलने के बाद खुद को रोक नहीं पाते [2, 8]। इससे भी बुरी बात यह है कि ये शरीर में यूरिक एसिड को डेंजरस लेवल तक बढ़ा देते हैं, जिससे एक्यूट गाउट अटैक आ सकता है और पैरों के जॉइंट्स में एसिड क्रिस्टल्स बन सकते हैं [7]।
3. पॉलीसोर्बेट 80 / INS 433: आंतों को धोने वाला रसायन (टॉक्सिसिटी स्कोर: 8.5/10)
यह क्या है: पॉलीसोर्बेट 80 एक केमिकल इमल्सीफायर है जिसका इस्तेमाल तेल और पानी को आपस में जोड़े रखने (मिक्स करने) के लिए किया जाता है [8]।
यह कहां छिपा है: यह आमतौर पर आइसक्रीम (जैसे वाडीलाल, हैवमोर, और बास्किन रॉबिंस), पैकेट वाले कोकोनट मिल्क, और लिक्विड मसालों (जैसे लौंग, अदरक के लिक्विड एक्सट्रैक्ट) में पाया जाता है [1, 9]।
खतरा: टॉप मेडिकल जर्नल्स ने साबित किया है कि जब INS 433 आपके पेट में जाता है, तो यह वही काम करता है जो साबुन गंदे बर्तनों पर करता है [8, 9]। यह हमारी आंतों के अंदर की पतली प्रोटेक्टिव म्यूकस लेयर को पूरी तरह धो डालता है [9]। इसके नतीजे में ‘लीकी गट सिंड्रोम’ (Leaky Gut Syndrome) होता है, जिससे पेट के टॉक्सिक बैक्टीरिया सीधे आपके खून (ब्लडस्ट्रीम) में लीक होने लगते हैं [9]। यह यूरोप के ऑर्गेनिक फूड्स में बैन है और WHO द्वारा इन्फेंट (शिशु) फूड्स में रिस्ट्रिक्टेड है [10]।
4. माल्टोडेक्सट्रिन: “शुगर-फ्री” स्कैम (टॉक्सिसिटी स्कोर: डायबिटीज वालों के लिए बेहद खतरनाक)
यह क्या है: यह एक सस्ता लैब-मेड पाउडर है जिसका उपयोग स्प्लेंडा (Splenda) और शुगर फ्री नेचुरा (Sugar Free Natura) जैसे आर्टिफिशियल स्वीटनर्स में फिलर के रूप में किया जाता है [10]। “फाइव कैलोरी रूल” नामक लूपहोल के कारण, यदि किसी सर्विंग साइज में पांच कैलोरी से कम हो, तो ब्रांड उसे कानूनी रूप से “जीरो कैलोरी” लेबल कर सकते हैं [10, 11]।
यह कहां छिपा है: आर्टिफिशियल स्वीटनर्स, ब्रिटानिया न्यूट्री चॉइस डाइजेस्टिव बिस्किट्स, हेल्थ ड्रिंक्स जैसे बॉर्नविटा, किमची कप नूडल्स, और मसाला ओट्स में [11]।
खतरा: कंपनियां माल्टोडेक्सट्रिन वाले प्रोडक्ट्स पर “नो एडेड शुगर” लिखती हैं क्योंकि फूड अथॉरिटी (FSSAI) इसे चीनी की तरह नहीं बल्कि कार्बोहाइड्रेट की तरह कैटेगराइज करती है [11, 12]। लेकिन जहां रिफाइंड चीनी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 65 होता है, वहीं माल्टोडेक्सट्रिन का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 136 तक होता है [11]। यह सामान्य चीनी से दोगुना तेजी से ब्लड शुगर बढ़ाता है, जो खून में “शुगर बम” फूटने जैसा है [11]। इसके अलावा, ई. कोलाई और साल्मोनेला जैसे हानिकारक बैक्टीरिया माल्टोडेक्सट्रिन से आसानी से चिपक जाते हैं, जो IBS और IBD (इर्रिटेबल बाउल डिजीज) का बहुत बड़ा कारण बनता है [12]।
5. सोडियम नाइट्राइट / INS 250: गुलाबी जहर (टॉक्सिसिटी स्कोर: 10/10)
यह क्या है: यह एक कॉस्मेटिक जहर है जिसका इस्तेमाल फूड इंडस्ट्री पुराने, प्रोसेस्ड मीट को सड़ने से बचाने और उसे नकली फ्रेश गुलाबी रंग देने के लिए करती है [13]।
यह कहां छिपा है: बड़े ब्रांड्स के पैकेटबंद सलामी, हॉट डॉग्स, और सॉसेजेस में [13]।
खतरा: WHO ने INS 250 को ‘ग्रुप 1 कार्सिनोजेन’ (Group 1 Carcinogen) घोषित किया है, यानी इसे सिगरेट, तंबाकू, एस्बेस्टोस और प्लूटोनियम की कैटेगरी में रखा गया है [13]। जब यह रसायन पेट के एसिड से मिलता है या हाई हीट पर पकाया जाता है, तो यह नाइट्रोसामाइंस (nitrosamines) बनाता है – जो आपके डीएनए को म्यूटेट करता है और पेट और आंत (Bowel) का कैंसर पैदा करता है [14]। मेडिकल फील्ड में इसे “ऑक्सीजन ब्लॉकर” कहा जाता है [14]। इसके एक्सेस डोज़ से खून ऑक्सीजन कैरी करना बंद कर देता है, जिससे हेल्दी लाल खून डार्क ब्राउन हो जाता है और इंसान अंदर ही अंदर बिना सांस रोके सफोकेट हो जाता है [14]। रोजाना सिर्फ 50 ग्राम प्रोसेस्ड मीट खाने से कैंसर का रिस्क 18% बढ़ जाता है [14]
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अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और इसे डॉक्टरी सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। किसी भी आहार में बदलाव करने से पहले कृपया अपने डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ (Nutritionist) से सलाह ज़रूर लें। WorldWire.in इसकी पुष्टि नहीं करता है।
